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सीआईसी और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर बंद कमरे में 88 मिनट की हाई-लेवल बैठक, राहुल गांधी ने जताई कड़ी असहमति

:: Editor - Omprakash Najwani :: 11-Dec-2025
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संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 10 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच पीएमओ में बंद कमरे में हुई 88 मिनट की बैठक ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। संसद में अमित शाह और राहुल गांधी के बीच हाल की तीखी नोकझोंक के बीच इस गोपनीय बैठक को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बैठक में मुख्य सूचना आयुक्त और आठ सूचना आयुक्तों सहित एक सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति पर विस्तृत चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने नियुक्त किए जाने वाले अधिकारियों के बारे में अधिक जानकारी मांगी और नियुक्ति के पैमानों तथा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीआईसी और आठ सूचना आयुक्तों की चयन प्रक्रिया पर असहमति दर्ज कराते हुए लिखित रूप में अपना विरोध भी रखा। राहुल गांधी ने एसटी, एससी, ओबीसी और माइनॉरिटी समुदायों को बड़े पदों पर प्रतिनिधित्व देने की वकालत करते हुए कहा कि देश की 90 प्रतिशत आबादी को निर्णयकारी भूमिकाओं में स्थान मिलना चाहिए।

बैठक के बाद सामने आया कि चर्चा मुख्य रूप से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर केंद्रित थी। इससे पहले अटकलें थीं कि बैठक चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर है, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह सीआईसी से जुड़ी रिक्तियों को भरने को लेकर थी। यह भी सामने आया कि 2014 के बाद यह सातवां मौका है जब देश में मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली पड़ा है। 2023 में बने हीरालाल सामारिया ने 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर 13 सितंबर को पद छोड़ा था।

सीआईसी की वेबसाइट के अनुसार आयोग के सामने 3083 मामले लंबित हैं। राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठा, जहां तृणमूल कांग्रेस सांसद मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि पद खाली होने से अपीलों के निस्तारण में दो से तीन वर्ष की देरी हो रही है और इतनी देर बाद सूचना का महत्व समाप्त हो जाता है। उन्होंने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि वह नागरिकों को जानकारी देने से बच रही है।

आरटीआई अधिनियम की धारा 12(3) के अनुसार, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी समिति का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है, जिसमें विपक्ष का नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं। आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और 10 सूचना आयुक्तों का प्रावधान है, जो आरटीआई आवेदकों की अपीलों और शिकायतों पर अंतिम फैसला देते हैं।

88 मिनट तक चली इस अहम बैठक में राहुल गांधी द्वारा कई आपत्तियों का दर्ज होना इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है, जबकि नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।


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