सोनिया गांधी ने महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के लिए तत्काल सुधारों की उठाई मांग
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी ने मंगलवार को शून्यकाल के दौरान लाखों महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की दुर्दशा को उजागर किया। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों तथा सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल सुधारों की मांग की। सोनिया गांधी ने इन सरकारी पहलों को महिला सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण मार्ग बताया, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास में उनके अपरिहार्य योगदान के बावजूद अत्यधिक कार्यभार, कम वेतन और कम महत्व दिए जाने पर खेद व्यक्त किया।
सोनिया गांधी ने कहा कि स्वयंसेवी के रूप में वर्गीकृत आशा कार्यकर्ता टीकाकरण अभियान, मातृ स्वास्थ्य सहायता और परिवार कल्याण कार्यक्रमों जैसे महत्वपूर्ण कार्य संभालती हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा के साथ कम मानदेय मिलता है। उन्होंने एकीकृत बाल विकास सेवा योजना में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की केंद्रीय भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्र सरकार से कार्यकर्ताओं को लगभग 4,500 रुपये और सहायिकाओं को 2,250 रुपये मासिक मूल मानदेय मिलता है, जिसमें राज्यों द्वारा समय-समय पर अतिरिक्त राशि जोड़ी जाती है।
कांग्रेस नेता ने देशभर में आईसीडीएस के विभिन्न स्तरों पर लगभग तीन लाख रिक्तियों की ओर ध्यान दिलाया, जिसके कारण लाखों बच्चों और माताओं को आवश्यक पोषण, स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कम वेतन के साथ-साथ कर्मचारियों की कमी सेवा वितरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। यहां तक कि पद भरने की स्थिति में भी 2011 के बाद से अद्यतन जनगणना आंकड़ों के अभाव में जनसंख्या मानदंडों के अनुसार व्यवस्थाएं अपर्याप्त बनी हुई हैं।
सोनिया गांधी ने सरकार से राज्यों के सहयोग से उपायों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। इनमें सभी मौजूदा रिक्तियों को भरना, कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक सुनिश्चित करना, इन अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के वेतन में केंद्र सरकार के योगदान को दोगुना करना, 2,500 से अधिक आबादी वाले गांवों में एक अतिरिक्त आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति करना और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या को दोगुना करना शामिल है, ताकि पोषण और स्वास्थ्य पहलों के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को भी सुदृढ़ किया जा सके।
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