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बांके बिहारी मंदिर में दर्शन समय बदलाव और देहरी पूजा पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

:: Editor - Omprakash Najwani :: 16-Dec-2025
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सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार और न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार समिति से मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी जी महाराज मंदिर में दर्शन के समय में परिवर्तन और देहरी पूजा बंद किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए 7 जनवरी 2026 तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह याचिका मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी के माध्यम से दायर की गई है।

याचिका में समिति द्वारा लिए गए उन निर्णयों को चुनौती दी गई है, जिनमें मंदिर के दर्शन समय में बदलाव और पारंपरिक देहरी पूजा को बंद करना शामिल है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के 8 अगस्त के पूर्व आदेश के विपरीत हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि समिति को मंदिर की आंतरिक धार्मिक प्रथाओं, जैसे पूजा, सेवा और प्रसाद, में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

याचिका के अनुसार देहरी पूजा एक पवित्र अनुष्ठान है, जो मंदिर के आम जनता के लिए बंद रहने के दौरान किया जाता है। यह पूजा सुबह 6 बजे से 8 बजे तक, दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक और रात 9 बजे से 10 बजे तक संपन्न होती है। भक्तों का विश्वास है कि देहरी देवता के चरणों का प्रतीक है और इस दौरान सुगंध, फूल और प्रार्थना अर्पित की जाती हैं। याचिका में कहा गया है कि इस अनुष्ठान को रोकना मनमाना और अन्यायपूर्ण है तथा संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत गोस्वामी समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

मंदिर समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि उच्चाधिकार समिति ने सदियों से चले आ रहे मंदिर के खुलने के समय में बदलाव कर दिया है। उन्होंने कहा कि नए कार्यक्रम से देवता के सोने और आराम करने का समय प्रभावित हो रहा है, जिसे पारंपरिक रूप से धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा माना जाता है। इन बदलावों से देवता के जागने और सोने सहित अन्य महत्वपूर्ण आंतरिक अनुष्ठानों के समय में भी परिवर्तन आया है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि देवता को एक मिनट के लिए भी आराम नहीं करने दिया जा रहा है और इसी दौरान सबसे अधिक शोषण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मोटी रकम चुका सकते हैं, उन्हीं को विशेष पूजा की अनुमति दी जाती है।


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