एमजीएनआरईजीए का नाम बदलने पर कांग्रेस का हमला, बीके हरिप्रसाद ने मोदी पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने मंगलवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने की खबरों पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मोगैम्बो बताते हुए ग्रामीण गरीबों को रोजगार देने में विफल रहने का आरोप लगाया। पत्रकारों से बातचीत में हरिप्रसाद ने कहा कि जो व्यक्ति ग्रामीण गरीबों को रोजगार देने में पूरी तरह असफल रहा है, उनके लिए केवल एमजीएनआरईजीए ही रोजगार का सहारा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के अलावा मोगैम्बो के रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने देश के गरीबों के लिए कुछ किया है।
इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा मंगलवार दोपहर लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दो दशक पुराने एमजीएनआरईजीए को बदलने वाले विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी विधेयक 2025 का विरोध करने के लिए हस्तक्षेप करेंगी। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एमजीएनआरईजीए योजना के पुनर्गठन को गांधी का नाम मिटाने और कार्यक्रम को कमजोर करने का प्रयास बताया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यह केवल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह एमजीएनआरईजीए को खत्म करने की भाजपा-आरएसएस की साजिश है। उन्होंने कहा कि संघ की शताब्दी पर गांधी का नाम मिटाना यह दिखाता है कि जो लोग विदेशों में बापू को फूल चढ़ाते हैं, वे कितने खोखले और पाखंडी हैं। गरीबों के अधिकारों से मुंह मोड़ने वाली सरकार ही एमजीएनआरईजीए पर हमला करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संसद और सड़कों पर ऐसे किसी भी फैसले का कड़ा विरोध करेगी, जो गरीबों और श्रमिकों के खिलाफ है।
प्रस्तावित वीबी-जी राम जी विधेयक में एआई आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने, रीयल-टाइम डैशबोर्ड, जीपीएस और मोबाइल आधारित निगरानी, साप्ताहिक सार्वजनिक खुलासे और प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए साल में दो बार सामाजिक लेखापरीक्षा जैसे नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। विधेयक में केंद्रीय और राज्य संचालन समितियों के माध्यम से बेहतर निगरानी की व्यवस्था का भी उल्लेख है। इसके तहत कार्यक्रम को केंद्रीय क्षेत्र की योजना से केंद्र प्रायोजित योजना में बदला गया है, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का वित्त पोषण अनुपात, उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात तथा विधानसभा रहित केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पूर्ण केंद्रीय वित्त पोषण का प्रावधान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 18वीं लोकसभा का छठा सत्र और राज्यसभा का 269वां सत्र 1 दिसंबर को प्रारंभ हुआ, जो संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत है। यह सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा।
Latest News
Thu-08-Jan - 78वें सेना दिवस परेड के सफल आयोजन को लेकर समीक्षा बैठक, अजमेर से होगी व्यापक जनभागीदारी
Mon-15-Dec - टेलीग्राम पर बच्चियों के आपत्तिजनक वीडियो साझा करने का आरोप, मेरठ के युवक पर मामला दर्ज