राहुल गांधी ने जी राम जी विधेयक को बताया "राज्य और गांव विरोधी", विपक्ष ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर पारित ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को राज्य और गांवों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मनरेगा की अधिकार-आधारित, मांग-आधारित गारंटी को खत्म कर इसे एक सीमित योजना में बदल देता है, जिसे दिल्ली से नियंत्रित किया जाएगा।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा कि मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस वर्षों को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक की संरचना ही राज्यविरोधी और गांवविरोधी है और इसे संसद में बिना उचित जांच-पड़ताल के जबरन पारित कराया गया। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति को भेजने की विपक्ष की मांग खारिज कर दी गई, जबकि विधेयक ग्रामीण सामाजिक करार को बदलने वाला और करोड़ों मजदूरों को प्रभावित करने वाला है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को मोलभाव की ताकत दी, रोजगार सुनिश्चित किया और ग्रामीण ढांचे का निर्माण किया। कोविड-19 महामारी के दौरान यह योजना लाखों लोगों को भूख और कर्ज में डूबने से बचाने में मददगार रही, खासकर महिलाओं को, जिन्होंने कुल व्यक्ति-दिवसों का आधा योगदान दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य श्रम और ग्रामीण भारत-खासकर दलित, ओबीसी और आदिवासियों की मोलभाव की ताकत को कमजोर करना और सत्ता का केंद्रीकरण करना है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों, पंचायतों और राज्यों के साथ खड़े रहकर इस कानून को वापस कराने और ग्रामीण गरीबों की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी मोर्चा बनाएगी।
विपक्ष ने संसद में बिल पास होने के विरोध में संसद परिसर और संविधान सदन के बाहर प्रदर्शन किया। तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सदन की एंट्री सीढ़ियों पर विरोध जारी रखा।
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